Saturday, March 21, 2026

यह क्या समय है दोस्तों !!

 इज़्ज़त देना और प्यार करना इंसान का मूल स्वभाव होना चाहिए । आज की पीढ़ी इस बात को महसूस नहीं करती है । वह दुनिया के सामने नतमस्तक रहती है और अपनों की भावनाओं के साथ खेलती है । यह पीढ़ी इतनी स्वार्थी है कि उन्हें अपने दिखाई नहीं देते हैं । उनकी नज़र में वे ना तो शिक्षित है , ना ही कोई दक्षता है ना ही वे कुछ जानते हैं । औलाद के लिए माता -पिता और परिवार पूरी ज़िंदगी लगा देते हैं  और उनके हाथ लगती हैं तो बस चिल्ल पौं और कड़वाहट । वे अपना ग़ुस्सा , कसैले भाव और तीखी ज़बान सिर्फ उन्हीं पर चलाते हैं । इन परिस्थितियों में भी हर परिस्थिति की ही तरह औरत की ही हार होती है वह संतान से उस तरह सुनती है जैसे उसका पिता उसे आदेश दे रहा हो । वह अपनी स्थिति पर मन मसोस कर रह जाती है । जाने कितने दंशों की ही तरह एक और घाव अपने भीतर दबा लेती है । यहाँ भी उसे ना आदर मिलता है ना ही प्रेम । पिता उसके भविष्य की चिंता किए बग़ैर पाई पाई बचाता है पर ये  उसे अपना अधिकार मानते हैं ।  टूटे हुए परिवार की स्थिति और विकट है वहाँ पर बच्चे स्वयं के मनोवैज्ञानिक दबाव व टूटन की बात करते नज़र आते हैं पर उन्हें अपने पिता या माता के उस संघर्ष का पता नहीं होता ।  कुल जमा बात सिर्फ़ इतनी है कि माता - पिता कुछ कहकर , राह दिखाकर उन्हें उन चोटों से बचाने की कोशिश करते हैं जो शायद किसी उम्र में उन्होंने झेली हो । वह फिसलन बड़ी होती है और उनकी भावनाएँ उससे भ बड़ी और भोली पर ये बातें स्वयं में सिमटते और स्वार्थी बच्चे कहाँ समझ पाते हैं । धन्य हैं वे बच्चे जिन्हें जान न्योछावर करने वाले माता पिता का साया मिलता है और धन्य हैं वे  माता -पिता जिनके हर कहे पर बच्चे कान धरते हैं ।



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