Wednesday, April 6, 2016

आतिथ्य पर उठते सवाल


हर देश के पर्यटन स्थल वहाँ की सांस्कृतिक धरोहर होते हैं। सैलानियों की आमद से ही ये पर्यटन स्थल गुलज़ार होते हैं। भारत की छवि विश्व में शांति और समभाव के अग्रदूत की रही है। अतीत पर चहलकदमी करें तो यहीं पर  वसुधैव कुटुम्बकम् जैसी अवधारणाएँ पनपी और विकसित  भी हुई। यही कारण है कि भारत विश्व के पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। आँकड़े बताते है कि  यहाँ के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही में निरन्तर इज़ाफ़ा हो रहा है। परन्तु क्या हमारा देश सैलानियों का यथोचित् आतिथ्य कर पा रहा है। सैलानियों के प्रति दुर्व्यवहार और उन्हें धोखा देने संबंधी अनेक प्रसंग हम आए दिन समाचार पत्रों में पढ़ते रहते हैं, जो राष्ट्र की छवि को धूमिल कर रहे हैं।

 देश के उत्तर पश्चिम  में अवस्थित धोरों की  धरती राजस्थान पर भी अन्य राज्यों की ही तरह  अनेक सुरम्य दर्शनीय स्थल हैं जो सैलानियों को आकर्षित करते हैं।राजस्थान समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को लेकर चलता है। यहाँ का तीर्थराज पुष्कर सैलानियों का गढ़ है। यहाँ की गंगा ज़मुनी तहज़ीब  पर्यटकों के आकर्षण का मुख़्य केन्द्र है। अरावली पर्वतमाला की इन घाटियों में अज़ान औऱ घहराती घंटा ध्वनि हर मन को अलौकिक अनुभूतियाँ कराती है शायद यही कारण है कि आम दिनों में भी वहाँ स्थानीय निवासियों से ज़्यादा सैलानी ही दिखाई देते है। परन्तु हाल ही में यहाँ पर स्पेनिश दम्पति के साथ घटी घटना हमारी मेजबानी को शर्मसार करती है। विदेशी पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ की ये घटनाएँ मानवीय जीवन मूल्यों पर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं।  गौरतलब है कि यहाँ के कुछ स्थानीय  लोगों ने घूमने आई स्पैनिश महिला का पीछा किया और उसके साथ शारिरीक उत्पीड़न का प्रयास किया।  महिला का आरोप यह भी है कि उन्होंने उनके साथी पर भी हमला किया। हमलावर  नशे के उन्माद में इस घटना को अंजाम दे रहे थे औऱ बताया जा रहा है कि हमले में घायल स्पैनिश व्यक्ति के सर पर पत्थर से हमला किया गया था और उसे गहरी चोट आई है।
यह अकेली घटना नहीं है जो पर्यटन को शर्मसार करती है वरन् समय समय पर ऐसी अनेक घटनाएँ घटित होती हैं जिस का शिकार पर्यटक बनते हैं।  बीते दिनों  मध्यप्रदेश के ओरछा के जहांगीर महल में भी  फ्रांस एवं स्विटजरलैंड की महिला पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। सवाल उठते हैं कि आखिर क्या कारण है कि तमाम कानूनी बाध्यताओँ औऱ त्वरित  न्यायिक प्रक्रियाओं और निर्णयों के बाद भी ये घटनाएँ निरन्तर घटती रहती हैं। ये सैलानियों में तो असुरक्षाबोध पैदा करती ही हैं साथ ही भारत की सांस्कृतिक और अन्तर्राष्ट्रीय छवि को भी ठेस पहुँचाती हैं। भारत में पर्यटन के विकास और उसे बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय नोडल एजेंसी है और  वह "अतुल्य भारत" अभियान के माध्यम से पर्यटन के क्षेत्र में अभिनव प्रयोग और देख-रेख करता है। रिपोर्टस के आइऩों में , विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद् के अनुसार, भारत, सर्वाधिक 10 वर्षीय विकास क्षमता के साथ, 2009-2018 से पर्यटन का आकर्षण केंद्र बन जाएगा । यात्रा एवं पर्यटन प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट  ने भी  भारत में पर्यटन को प्रतियोगी क़ीमतों के संदर्भ में 6वां तथा सुरक्षा व निरापदता की दृष्टि से 39वां दर्जा दिया है। परन्तु  आँकड़ों की यह गणित और  विकासात्मक रिपोर्ट्स के दावे उस समय खोखले नज़र आऩे लगते हैं जब पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं बढ़ने लगे।
व्यक्ति यात्रा पर स्व की खोज और आत्मिक शांति के लिए निकलता है। इन यात्रा के पड़ावों के रूप में वह उन स्थानों को चुनता है जो वैश्विक मानचित्र पर सुरक्षित और लोकप्रिय हैं। ऐसे में दुर्व्यवहार की ये घटनाएं पर्यटन पर नकारात्मरक असर डालती हैं।  वस्तुतः पर्यटन केवल समय  औऱ स्थान के बदलाव का सूचक नहीं है। यह व्यक्ति जीवन में खुशियों की बढ़ोतरी तो करता ही है साथ ही देश के सामाजिक, सांस्कृतिक ,राजनैतिक और आर्थिक विकास में भी अहम् भूमिका अदा करता है। भारत की अर्थव्यवस्था का विकासात्मक पक्ष भी पर्यटन से जुड़ा है। आज विश्व में  आतंकवाद के दानव के कारण पर्यटन के स्थल वैसे ही कम हो गए हैं । ऐसे में अगर कुछ असामाजिक तत्व अपने अनैतिक कृत्यों से हमारे देश की छवि को धूमिल पहुँचाने का प्रयास करते हैं तो यह घोर निंदनीय है। राजस्थान की मरूभूमि पधारो म्हारे देश जैसी सात्विक विचारधारा को लेकर चलती हैं । यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि राजस्थान ही पहला राज्य है जिसने पैलेस ऑन व्हील्स जैसी शाही रेलगाड़ी सेवा प्रारम्भ कर पर्यटन के क्षेत्र में अभिनव प्रयोग किया। परन्तु ऐसे कृत्य उन तमाम विकासात्मक कदमों को कुछ पीछे धकेल देते हैं जिसे सरकार और संबंधित मंत्रालय कई बरसों से कर रहा होता है।
जब तक कोई देश मूल्यों के प्रति औऱ अपनी सांस्कृतिक धरोहर की ओर सचेत नहीं होता वह विश्व में अपनी पहचान कायम नहीं रख सकता।  हमारी संस्कृति में अतिथि को देवता का दर्ज़ा दिया गया है परन्तु ऐसे कृत्य समूची परम्पराओं और सांस्कृतिक थाती को चुनौति दे डालते हैं जिसे बनाने में न जाने कितने वर्षों औऱ पीढ़ियों का समय लगा होगा। माना कि विदेशी रहन-सहन अपने स्वच्छंद तौर तरीकों से आकर्षण का केन्द्र बनता है परन्तु हम अगर हमारें मूल्यों का निरीक्षण करते हुए अपने व्यवहार को संयमित कर और ऐसे तत्वों की घेराबंदी करने में प्रशासन का सहयोग कर अपने दायित्व का निर्वहन कर सकते हैं। ऐसे सभी मामलों को रोकने के लिए सभी पर्यटन स्थलों को अतिसंवेदनशील मानते हुए सैलानियों की सुरक्षा की पुख्ता जवाबदेही तय करना होगी जिससे  सांस्क़ृतिक परम्पराएँ  आपसी वैचारिक विनिमय से एक दूसरे को लाभान्वित कर सकॆ और हर सैलानी मन परदेसी धरा में अपने देश सा आनंद प्राप्त कर सके।

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चित्र - google  से साभार                                                                                                                                    
  @vimleshsharma