Monday, March 9, 2009

एहसास ...........

दिल की हसरत छुपाऊं कैसे,

चाहत अपनी जताऊं कैसे।

जिंदगी ने कुछ यों मोड़ लिया

राह पर इसको लाऊं कैसे ।

यादों के घनेरे जंगल हैं,

आशियाँ सपनों का बनाऊं कैसे।

उम्मीदों के पंख लगाकर ,

हसरतों के पंछी उडाऊं कैसे।

रातों की जागती तन्हाइयों में,

ख़ुद को ख़ुद से बहलाऊं कैसे।

प्यार का एहसास रुला देता है ,

ख़ुशी इन अश्कों की दबाऊं कैसे।

ज़िन्दगी करीब नज़र आती है,

तुमको भी करीब लाऊं कैसे..........

विमलेश शर्मा .......

2 comments:

leena said...

Har ehsas kych khas hai aur aap jaisa dost saath ho to jeevan ek madhus saaj hai

16 Degree said...

fantastic poem.