Monday, March 9, 2009

यह रंग.....

यह रंग तुम्हें मुबारक हो.....
बासन्ती हवा मैं डूबे गुलाबों सा,
मस्ती मैं घुले अनबीते क्षणों सा,
पहली बारिश मैं भीगी किसलय सा,
प्रकृति की क्रोड़ मैं पली कोमल रचना सा,
यह रंग तुम्हे मुबारक हो.......
नवीन क्रांतिकारी विचारों का,
जीवन के अविरल प्रवाहों का,
उपलब्धियों और उत्साहों का,
सामर्थ्य और आकाँक्षाओं का,
यह रंग तुम्हे मुबारक हो........
रिश्तों मैं घुली केसर सा,
कोमल हाथों की छुंअन सा ,
अनकहे शब्दों की अनुभूति सा,
नित नए रोमांच और अनुभव का,
यह रंग तुम्हें मुबारक हो..........
विमलेश शर्मा.........



एहसास ...........

दिल की हसरत छुपाऊं कैसे,

चाहत अपनी जताऊं कैसे।

जिंदगी ने कुछ यों मोड़ लिया

राह पर इसको लाऊं कैसे ।

यादों के घनेरे जंगल हैं,

आशियाँ सपनों का बनाऊं कैसे।

उम्मीदों के पंख लगाकर ,

हसरतों के पंछी उडाऊं कैसे।

रातों की जागती तन्हाइयों में,

ख़ुद को ख़ुद से बहलाऊं कैसे।

प्यार का एहसास रुला देता है ,

ख़ुशी इन अश्कों की दबाऊं कैसे।

ज़िन्दगी करीब नज़र आती है,

तुमको भी करीब लाऊं कैसे..........

विमलेश शर्मा .......

इम्तहान.....

सितारों के आगे जहाँ और भी हैं ,

अभी जिंदगी के इन्तहां और भी है।

आशाओं के साथ निराशाएँ भी हैं,

मगर साथ-साथ तमन्नाएँ भी हैं।

खुशियों की जहाँ मैं कमी तो नहीं ,

मगर साथ गम का भी कम तो नहीं।

माना ....दुखों को झेलना आसां तो नहीं,

मगर होंसलों की यहाँ कमी तो नहीं।

आंसुओं का समंदर अगर संग हैं,

साथ सपनो की दुनियाँ के भी रंग हैं।

मेरे ख्वाबों का सेतु बड़ा तो नहीं,

मगर मंजिलों की कमीं तो नहीं।

सितारों के आगे जहाँ और भी हैं .........

अभी ज़िन्दगी के इम्तहां और भी हैं.............