Friday, March 27, 2009

मुलाकात.......

आज हमने किसी से मुलाकात की,

वह मुलाकात थी... पर थी एक दुखान्तिका।

जिंदगी के कई राज़ मालूम हुए हमें उससे,

आँखे नम हुई जो सुनी उसकी कहानी उससे।

वह एक नारी थी जो जीवन से हारी थी ,

नारीत्व ... था उसके लिए अभिशाप ....

रोज़ जलती थी वह चिंता की चिता मैं,

कड़वाहट मैं वह जो जी रही थी।

वह कोसती थी उसके नारी जीवन को......

बड़ा रोचक जीवन था उसका,

चूल्हा, चौका व चारदीवारी थी,जिसकी वह अधिकारिणी थी ।

बचपन लुटा था बरसों पहलें अब तो यादें भी धूमिल हो गई थी.....

प्यार .......

जिंदगी से जो एक बार जो पूछा मैंने ,
प्यार शब्द क्यों बनाया तुने....
हंस दी वो मेरे हालात पर ,
जो बात थी वह जानकर ।
बोली फिर वोह तपाक से ,
जो प्यार जिंदगी मैं हुआ न होता ......
पत्थर दिल किसी का रोया न होता ,खुशी की बहार आई न होती...
रस की कली वो खिली न होती, ख्वाब किसी का टूटा न होता....
जो प्यार जिंदगी मैं हुआ न होता.......
मैं खड़ी थी मूक सी यह सुनकर,
जीवन का सारा यथार्थ जानकर ,
कोई ख्वाब कभी न बुना हो जैसे,
कोरे कागज सा कोई मन हो जैसे।

दोस्ती

दोस्ती वो फूल है,

जिसकी मुस्कान होठो पर खिली रहती है।

दोस्ती वो जर्रा है,

जिससे दिल जुड़े रहते हैं ।

दोस्ती ...वो जस्बा है ....

जो हर किसी को नही मिलता।

दोस्ती वो गीत है,

जिसे गुनगुनाना सभी चाहते हैं।

दोस्ती...जिंदगी की बहार है,

खुदा का दिया ,अनमोल उपहार है...जिसे पाना हर कोई चाहता है।

दोस्ती...वह बंदगी है ....

जिसे पूजना हर कोई चाहता है।

खुबसूरत फूलों का हार है दोस्ती ,

सच का व्यवहार है दोस्ती...दो दिलो को गहराई से समझने का सार है दोस्ती।

दोस्ती.....वो खुबसूरत दिल है जो हर किसी के पास नही होता ।

वह भूल है दोस्ती....

जिसे जान कर भी हर कोई दोहराना चाहता है ।

जो कभी टूटती नही.... वह आस है दोस्ती ,
हाँ दोस्तों ! विश्वास है दोस्ती.........