आप बचपन जैसी सादगी की बात करते हैं, तो फिर यूँ कम उम्र या उदासी की बातें मत लिखा कीजिए। इंसान किसी भी उम्र में बचपन जैसा रह सकता है, बस उसके भीतर सच्चा बचपना होना चाहिए। उम्र तो केवल संख्या है, खुदा करे आपको सौ साल से भी लंबी उम्र मिले और आप हमेशा यूँ ही मुस्कुराते रहें।
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आप बचपन जैसी सादगी की बात करते हैं,
तो फिर यूँ कम उम्र या उदासी की बातें मत लिखा कीजिए।
इंसान किसी भी उम्र में बचपन जैसा रह सकता है,
बस उसके भीतर सच्चा बचपना होना चाहिए।
उम्र तो केवल संख्या है,
खुदा करे आपको सौ साल से भी लंबी उम्र मिले और आप हमेशा यूँ ही मुस्कुराते रहें।
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